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आम्बेडकर और रविदास – जयपाल

अधिकारी महोदयतुम चाहे जिस भी जाति से होंहम अपनी बेटी की शादी तुम्हारे बेटे से कर सकते हैंपर हमारी भी एक प्रार्थना हैसगाई से पूर्व तुम्हें अपने घर सेरविदास और…

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खाली हाथ – जयपाल

वे दिन भर शहर की सूरत संवारते हैंऔर अपनी सूरत बिगाड़ते हैंदिन ढलने परसिर नीचा करमुंह लटकाएचल पड़ते हैं वापिसअपने घरों की तरफहताश-निराशजैसे शमशान से लौटते हैं लोगखाली हाथ 

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जाले – जयपाल

जाले हर युग के होते हैंहर युग बुन लेता है अपने जालेहर युग चुन लेता है अपने जालेधूल मिट्टी से सने प्राचीन जालेमोती से चमकते नवीन जालेसमय इन जालों से…

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पाखण्डी – जयपाल

वे आर्थिक सुधार करेंगेमरने को मजबूर कर देंगेवे रोजगार की बात करेंगेरोटी छीन लेंगेवे शिक्षा की बात करेंगेव्यापार के केन्द्र खोल देंगेवे शान्ति की अपील करेंगेजंग का ऐलान कर देंगेवे…

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बच्चा – जयपाल

तमाशा दिखाता है बच्चान सांप से डरता है न नेवले सेन बंदर से न भालू सेन शेर से न हाथी सेरस्सी पर चलता है बच्चागिरने से नहीं डरताआग में कूदता…

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एक चुप्पी -जयपाल

सवेरे-सवेरेएक हाथ में टोकरीदूसरे में झाडूवह निकल पड़ती है घर सेजाती है एक घर से दूसरे घरएक मोहल्ले से दूसरे मोहल्लेकुछ दौड़ती हैकुछ भागती हैकुछ हंसती हैकुछ रोती हैकरती है…

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बहिष्कृत औरत – जयपाल

शहर से बाहर सेएक औरत शहर के अंदर आती हैघरों पर से मिट्टी झाड़ती हैफर्श चमकाती हैगलियों को बुहारती हैपी जाती है नालियों की सारी दुर्गंधगली-मुहल्लों को सजा देती है…

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पत्नी – जयपाल

पत्नी का लौट आता है बचपनजब दूर पार से मिलने आते हैं पिता जीपत्नी की आंखों में उतर आता है संमदरजब अचानक आकर मां सिर पर रखती है हाथपत्नी को…

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उनका सवाल – जयपाल

वे पूछते हैं –आज भी उनके सिर पर गंदगी का टोकरा क्यों रखा हैउनकी बस्ती शहर या गांवों से बाहर ही क्यों होती हैउनके मंदिरों-गुरुद्वारों में दूसरे लोग क्यों नहीं…

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बगुला और मछली – जयपाल

बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतापानी को भी देखता हैकितने पानी में है मछली बगुला केवल मछली को ही नहीं देखतासाथ घूम रही दूसरी मछलियों को भी देखता है…