मैं क्यों लिखता हूं? – दिनेश दधिची

  डॉ. दिनेश दधीचि (दिनेश दधीचि स्वयं उच्च कोटि के कवि व ग़ज़लकार हैं। और विश्व की चर्चित कविताओं के हिंदी में अनुवाद किए हैं, जिंन्हें इन पन्नों पर आप…

नदियों के बारे में नीग्रो का कहना है –  लैंग्स्टन ह्यूज़

 लैंग्स्टन ह्यूज़ (1902-1967) अनुवाद – दिनेश दधीचि नदियों को जाना है मैंने नदियाँ जो प्राचीन बहुत हैं; उतनी जितनी अपनी दुनिया. मानव की नस-नस में बहता रक्त नहीं था, तब…

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आज़ादी

सफ़दर हाशमी (1954-1989) अनुवाद – दिनेश दधिची आज़ादी आज़ादी किसको कहते हैं? यह भी एक सवाल है. क्या मतलब है इसका, सोचो, बोलो तो क्या ख्याल है? क्या इसका मतलब…

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चरण आपके पुष्प – स्वामी रामदास

स्वामी रामदास (1884-1963) अनुवाद दिनेश दधिची मधुमक्षिका पुष्प पर जैसे मँडराती है उसी प्रकार हृदय मेरा, हे प्रभो! आपके चरणों पर मँडराता है। वह करती है मधु-पान और यह अमृत-रस…

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साथ तैरने वालों को मशविरा – कमला दास

कमला दास (1934-2009) अनुवाद दिनेश दधिची  साथ तैरने वालों को मशविरा तैरना सीखोगे जब तुम उस नदी में मत उतरना जो न बहती हो समंदर की तरफ़ अनजान रहती हो…

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एक सरकार को श्रद्धांजलि – फ़िलिप लार्किन

फ़िलिप लार्किन (1922-1985) अनुवाद डा. दिनेश दधिची एक सरकार को श्रद्धांजलि अगले बरस सैनिकों को घर ले आएँगे। पैसे की तंगी है और यह ठीक भी है. वे जिन स्थानों…

अंततः – वेंडी बार्कर

वेंडी बार्कर  अनुवाद दिनेश दधिची एक-दूजे के जलाशय में रहे हम तैरते रात-भर धुलती रही घुलती रही चट्टान तट पर धार से . जल-धार से . खुरदरे सब स्थल हुए…

चार कविताएं – वेंडी बार्कर

वेंडी बार्कर (जन्म 1942 ) अनुवाद  दिनेश दधीचि (1) याद है हव्वा को मैंने तो बस उसका झुकना भर देखा पथ पर देखा—वह कुछ सोच-समझ कर झुका और फैलायी लंबी…

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मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम?

वाल्ट व्हिट्मन (1819-1892) मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम?   मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम? चेता दूँ शुरुआत में तुम्हें, जो कुछ तुमने…

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घायल हिरण

विलियम काउपर (1731-1800)  अनुवाद दिनेश दधीचि चोट खाया हिरण था मैं, अरसा पहले झुण्ड पुराना छूट गया था, साँस जिधर से लेता हूँ मैं, उधर बहुत-से तीर गड़े थे तन में, गहरे,…