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‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 2,294 जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका…

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दलित प्रेम का आशय – ‘प्रेमकथा एहि भांति बिचारहु’ – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 322 बजरंग बिहारी तिवारी प्रेम की सामर्थ्य देखनी हो तो संतों का स्मरण करना चाहिए। संतों में विशेषकर रविदास का। प्रेम की ऐसी बहुआयामी संकल्पना समय से बहुत…

हिंदी दलित साहित्य – 2018

Post Views: 819 बजरंग बिहारी तिवारी हिंदी दलित साहित्य : 2018      अन्य भारतीय भाषाओँ की तुलना में हिंदी दलित साहित्य इस मायने में भिन्न है कि यहाँ रचनाकारों की…

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घर की सांकल – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 368 बजरंग बिहारी तिवारी (हरपाल के कविता संग्रह घर की सांकल की समीक्षा) कविता जीवन की सृजनात्मक पुनर्रचना है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के…

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साहित्य का स्व-भाव और राजसत्ता – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 727 भारतीय मानस धर्मप्राण है इसलिए भारतीय साहित्य अपने स्वभाव में अध्यात्मवादी, रहस्यवादी है; यह धारणा औपनिवेशिक दौर में बनी। राजनीति में साहित्य की दिलचस्पी आधुनिक काल में…