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ओमप्रकाश ग्रेवाल और आलोचकीय व्यवहार की भूमिका- आनंद प्रकाश

संस्मरण सत्तर के दशक की शुरुआत में लिखे दो-तीन निबंधों से ही मार्क्सवादी आलोचना में ओम प्रकाश ग्रेवाल की स्पष्ट पहचान बन गई थी और मित्रों-सहकर्मियों के साथ-साथ विरोधियों  ने…

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ओमप्रकाश ग्रेवाल और आलोचकीय व्यवहार की भूमिका -आनंद प्रकाश

संस्मरण सत्तर के दशक की शुरुआत में लिखे दो-तीन निबंधों से ही मार्क्सवादी आलोचना में ओम प्रकाश ग्रेवाल की स्पष्ट पहचान बन गई थी और मित्रों-सहकर्मियों के साथ-साथ विरोधियों  ने…

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मुक्तिबोधःनैतिक साहस और वैचारिक जद्दोज़हद का कवि – आनंद प्रकाश

गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम पिछले दशकों में शिद्दत से उभरा है। यह क्योंकर हुआ कि जिस कवि का अपने जीवन काल में एक संकलन भी प्रकाशित न हो पाया…