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चसवाल साहेब यानी आबिद आलमी सिद्धांत के आदमी थे

अत्यंत धीर, गम्भीर चसवाल साहेब सिद्धांतों के आदमी थे, बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि वह सिद्धांतों के नहीं, बल्कि एक ही सिद्धांत के आदमी थे। उसी सिद्धांत ने उनकी तमाम शायरी को प्रेरित किया और वह उनकी सभी गतिविधियों के पीछे दिखाई देता था। चसवाल साहेब किसी भी शक्ल में किसी का भी, कहीं भी कोई शोषण नहीं सह पाते थे और उसके विरुद्ध आवाज उठाना वह अपना पहला इन्सानी फर्ज समझते थे।

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ज़ोहरा बाई अम्बाला वाली (अम्बाला) – महेन्द्र प्रताप चांद

ज़ोहराबाई बहुत ही शिष्ट, सुशील और स्वाभिमानी महिला थीं। फिल्मी दुनिया में वे अपने हर गीत के लिए दो हजार रुपए पारिश्रमिक लेती थीं, जो उस समय एक बहुत बड़ी राशि थी। बसंत देसाई के संगीत में बनी एक फिल्म ‘मतवाला शायर राम जोशी’ में उन्होंने बीस गाने गाये थे और चालीस हजार रुपए पारिश्रमिक लिया था। सन् 1950 के बाद कुछ नई गायिकाएं आ गईं और इन्हें कम पारिश्रमिक पर गाने के लिए कहा गया तो इन्होंने इसे स्वीकार करने की अपेक्षा फिल्मों में गाना ही छोड़ दिया। जबकि अधिकतर कलाकार प्राय: दौलत और शोहरत के पीछे भागते हैं, लेकिन ज़ोहराबाई पब्लिसिटी से बहुत दूर रहती थीं और प्रेस वालों से भी बहुत बिदकती थीं।

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जुल्मी होया जेठ- विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’

Post Views: 611 जुल्मी  होया  जेठ,  तपै  सै  धरती  सारी ताती  लू  के  महां,  जलै  से काया म्हारी। सूख गे गाम के जोहड़, ना आवै नहरां म्हैं पाणी बिजली भी…

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खबर मिली मुझे, सृजन उत्सव की

खबर मिली मुझे, और मैं उत्सव में चला आया।
सैनी जी ने कॉल कर, उत्सव से अवगत कराया।।
सृजन से कराया अवगत, मैंने राह मेवात से पकरी।
गुरु सिद्दीक मेव संग, जा पंहुचा धर्मनगरी।।

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मेवाती लोक जीवन की मिठास – डा. माजिद

मेवात का भौगोलिक फैलाव दिल्ली से लेकर फतेहपुर सीकरी के बीच बताया गया है, जिसमें गुड़गांव, फरीदाबाद, भरतपुर, दौसा, अलवर, मथुरा, आगरा, रेवाड़ी जिलों के बीच का भाग शामिल है। इस पूरे क्षेत्र को मेवात के नाम से जाना जाता रहा है, लेकिन आजादी के बाद पुनर्गठन हुआ और मेवात सिमट कर अलवर से लेकर सोहना तक और हथीन से लेकर तिजारा, भिवाडी तक रह गया है

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रामफल सिंह जख्मी

Post Views: 403 रामफल सिंह जख्मी जिला हिसार के गंगणखेड़ी गांव में 17 अक्तूबर, 1954 को जन्म। ज्ञान। औपचारिक शिक्षा नहीं मिली। साक्षरता अभियान के दौरान अक्षरज्ञान प्राप्त किया। रागनी,…

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रामकिशन व्यास

Post Views: 536 रामकिशन व्यास 11 अक्टूबर 1925 में जन्म हुआ। माईराम अलेवा के शिष्य। 1941 में सांग पार्टी बनाई। बीस सांगों तथा मुक्तक रागनियों और भजनों की रचना की।…

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जयसिंह

Post Views: 216 जयसिंह झज्जर जिले के रईया गांव में सन् 1946 में साधारण किसान परिवार में जन्म। 1985 से जनवादी नौजवान सभा के माध्यम से वामपंथी विचारों से जुड़े…

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हरिचन्द

Post Views: 258 हरिचन्द जिला जीन्द में सफीदों के पास हाट गांव निवासी हरिचन्द का जन्म 16 अक्तूबर 1941 को हुआ। गांव से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। राज मिस्त्री काम…