मैं हिन्दू, मेरा देश हिंदुस्तान पर यह हिन्दू राष्ट्र न बने – राजेंद्र चौधरी

असली लड़ाई सब के लिए शांति, सम्मान, आर्थिक सुरक्षा और न्याय की है. रोज़गार की है, सरकारी नौकरी की नहीं अपितु गरिमामय एवं सुरक्षित रोज़गार एवं व्यवसाय की है. और शायद अब तो सब से बड़ी लड़ाई साफ़ हवा और पानी की है. पर हिन्दू राष्ट्र जैसे मुद्दे हमें इन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित ही नहीं करने देते. कभी मंदिर, कभी घरवापसी, कभी लव ज़िहाद इत्यादि मुद्दों पर ही हमारा ध्यान लगा रहता है.

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पंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

लोहड़ी पंजाब के मौसम से जुड़ा ऐसा त्यौहार है, जिसकी अपनी अनुपम विशेषताएं हैं। जैसे यह त्यौहार पौष की अंतिम रात को मनाया जाता है, जबकि भारत के दूसरे भागों में अगले दिन ‘संक्रांति’ मनाई जाती है। इस त्यौहार पर पंजाब के लोग आग जलाते हैं। संक्रांति पर ऐसा नहीं होता, केवल नदियों-सरोवरों में स्नान किया जाता है। लोहड़ी में तिलों और तिलों की रेवड़ियों की आहूति दी जाती है।

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भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले – सुभाष चंद्र

भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने भारतीय समाज में मौजूद धर्मभेद, वर्णभेद, जातिभेद, लिंगभेद के खिलाफ कार्य किया। वे जैविक बुद्धिजीवी थी, जिन्होंने अपने अनुभवों से ही अपने जीवन-दर्शन का निर्माण किया। सावित्रीबाई फुले ने समाज में सत्य, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानव भाईचारे की स्थापना के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठाए।

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बन्दानवाज

1322 ई. में बंदा नवाज का जन्म हुआ। बंदा नवाज का पूरा नाम था सैयद मुहम्मद बिन सैयद युसुफुल अरूफ। इनके बाल बहुत बड़े-बड़े थे। अतः लोग इन्हें गेसू दराज (गेसू-बाल, दराज-बड़ा) भी कहते थे। इस समय ये ख्वाजा बन्दे नवाज गेसूदराज के नाम से स्मरण किए जाते हैं।

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ननकाना साहिब : एक ऐतिहासिक विरासत – सुरेंद्र पाल सिंह

आजकल करतारपुर कॉरिडोर खुल चुका है और गुरु नानकदेव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोजाना हज़ारों श्रद्धालु पाकिस्तान जा पा रहे हैं. फ़रवरी 1921 में ननकाना साहब गुरुद्वारा के महंत नारायण दास ने पठानों के हाथों 139 सिक्खों को (थॉर्नबर्न ICS के अनुसार) या तो ज़िन्दा जलवा दिया था या मरवा दिया था क्योंकि उसे शक था कि वे उसे गद्दी से हटाना चाहते थे.

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बाबा नानक – संतोख सिंह धीर

गुरु नानक का जन्म 1469 में, पंजाब प्रान्त के ननकाना साहब नामक स्थान पर हुआ, जो आज कल पाकिस्तान में है। वे महान विचारक और समाज सुधारक थे। उनका व्यक्तित्व साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने इनसान की समानता का संदेश दिया।

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निराशावादी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

Post Views: 150 पर्वत पर, शायद, वृक्ष न कोई शेष बचा धरती पर, शायद, शेष बची है नहीं घास उड़ गया भाप बनकर सरिताओं का पानी, बाकी न सितारे बचे…

भैंस का स्वर्ग – बालमुकुंद गुप्त

सन् 1905 में ‘स्फुट कविताएं’ नाम से बालमुकुंद गुप्त की कविताओं का संग्रह प्रकाशित हुआ। जिसमें उनकी समस्त कविताएं संकलित हैं। ‘भैंस का स्वर्ग’ गुप्त जी की पहली कविता है।