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गर बदल सकता है औरों की तरह चेहरा बदल ले- आबिद आलमी

Post Views: 225 ग़ज़ल गर बदल सकता है औरों की तरह चेहरा बदल ले वरऩा इस बहरूपियों के शहर से फ़ौरन निकल ले हां बहुत नज़दीक है अब इब्तिदा शब…

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होगा नगर में ख़ूब तमाशा गली-गली- आबिद आलमी

Post Views: 49 ग़ज़ल होगा नगर में ख़ूब तमाशा गली-गली दौड़ेगा जब वो आग का दरिया गली-गली वो एक-इक फ़सील का गिरना नगर-नगर वो इक अजीब शोर का उठना गली-गली…

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सीने में आग भी है, नज़र में हवा भी है- आबिद आलमी

Post Views: 39 ग़ज़ल सीने में आग भी है, नज़र में हवा भी है फिर रेज़ा-रेज़ा मरने से कुछ फ़ायदा भी है दरिया की बात करता है लेकिन य’ पूछ…

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उसी तड़प से उसी जोश से चलो यारो- आबिद आलमी

Post Views: 43 ग़ज़ल उसी तड़प से उसी जोश से चलो यारो सवेरा दूर नहीं है चले चलो यारो य’ चूस लेगा हमारे बदन से सारा लहू भला इसी में…

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अकेला ख़ुद को समझ कर मैं घर से निकला था- आबिद आलमी

Post Views: 103 ग़ज़ल अकेला ख़ुद को समझ कर मैं घर से निकला था क़दम-क़दम पे मगर क़ाफ़िलों का साथ मिला हमारे शहर के दस्तूर का कमाल है ये न…

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जब य’ मालूम है बस्ती की हवा ठीक नहीं- आबिद आलमी

Post Views: 50 ग़ज़ल जब य’ मालूम है बस्ती की हवा ठीक नहीं फिर अभी इसको बदल लेने में क्या ठीक नहीं मेरे अहबाब की आंखो में चमक दौड़ गई…

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नगर में सुनना-सुनाना अगर कभी होगा- आबिद आलमी

Post Views: 263 ग़ज़ल नगर में सुनना-सुनाना अगर कभी होगा हमारा जिक्र यक़ीनन गली-गली होगा मिटा दो राहों की उलझन और इक डगर ले लो य’ मंजि़लों का सफ़र य’…

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देखने में बेदरो-दीवार सा मैं इक मकां हूं -आबिद आलमी

जो लिखते फिरते हैं एक-इक मकां पे नाम अपना
उन्हें बता दो कि इक दिन हिसाब भी होगा
रात का वक़्त है संभल के चलो
ख़ुद से आगे ज़रा निकल के चलो
गर बदल सकता है औरों की तरह चेहरा बदल ले
वरऩा इस बहरूपियों के शहर से फ़ौरन निकल ले