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ये मैंने माना कुछ उसने कहा है, लेकिन क्या- आबिद आलमी

Post Views: 96 ग़ज़ल ये मैंने माना कुछ उसने कहा है, लेकिन क्या ! हमारा हाल सब उसको पता है,  लेकिन क्या!! मेरी सलीब तो रखवा दो मेरे कन्धों पर,…

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ये मैंने माना कुछ उसने कहा है, लेकिन क्या – – आबिद आलमी

Post Views: 42 ग़ज़ल ये मैंने माना कुछ उसने कहा है, लेकिन क्या ! हमारा हाल सब उसको पता है,  लेकिन क्या!! मेरी सलीब तो रखवा दो मेरे कन्धों पर,…

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बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगे – आबिद आलमी

Post Views: 50 ग़ज़ल बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगे आवाज़ों के घेरे में वो कैसे वक्त गुज़ारेंगे। आख़िर कब तक उसके घर के आगे हाथ पसारेंगे,…

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बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगे  – आबिद आलमी

Post Views: 32 ग़ज़ल बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगे आवाज़ों के घेरे में वो कैसे वक्त गुज़ारेंगे। आख़िर कब तक उसके घर के आगे हाथ पसारेंगे,…

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वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है- आबिद आलमी

Post Views: 38 ग़ज़ल वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है, मंज़िलों को ग़म उन्हीं को खा रहा है मेरा दिल है देखने की चीज़ लेकिन इस को छूना…

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वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है -आबिद आलमी

Post Views: 36 ग़ज़ल वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है, मंज़िलों को ग़म उन्हीं को खा रहा है मेरा दिल है देखने की चीज़ लेकिन इस को छूना…

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जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है- आबिद आलमी

Post Views: 51 जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है। वो आईने से डरता सा दिखाई देता है॥ किया था दफ़्न जिसे फर्श के नीचे कल रात, वो आज…

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जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है – – आबिद आलमी

Post Views: 36 जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है। वो आईने से डरता सा दिखाई देता है॥ किया था दफ़्न जिसे फर्श के नीचे कल रात, वो आज…