CHENNAI, 24/11/2017 : Prof. Krishna Kumar, former Director of NCERT, during an interview with The Hindu, in Chennai on Friday. Photo: R. Ravindran.

वर्तमान दौर में शिक्षा में दिशा के सवाल

रिपोर्ट

7 अक्तूबर 2018 को कुरुक्षेत्र के पंचायत भवन में डॉ.ओम प्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान द्वारा वार्षिक ‘ग्रेवाल स्मृति व्याख्यान’ करवाया गया। मुख्य वक्ता पदम् श्री प्रोफेसर कृष्ण कुमार ,पूर्व निदेशक, एन. सी.ई.आर. टी. ने’ वर्तमान दौर में शिक्षा में दिशा के सवाल’ दो घंटे पूरी अनुभवजन्य रचनात्मकता से विचार रखे।शिक्षा से जुड़े लोगों ने उन्हें मनोयोग से सुना।प्रो. कृष्ण कुमार ने कहा कि शिक्षा को एक व्यवस्था मानकर अगर आज हम इसके चिन्हों का अध्ययन करें तो पता चलेगा कि शिक्षा के अन्दर कैसा समाज बन रहा है और आने वाले दिनों में समाज के रूप में हम कैसे बनेंगे।उदाहरण के लिए पहचान चिन्ह के रूप में भाषा के माध्यम से हमें पता चलता है कि निजी संस्थानों और अंग्रेजी माध्यम ने पहले से चले आ रहे विघटन और विखराव को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।इसी विघटन के कारण वैचारिक एकाग्रता, सुनने सुनाने की परम्परा नष्ट हुई है। प्रो.कृष्ण कुमार ने कहा कि शिक्षा को एक विचार के रूप में देखने से यह भ्रामक अनुभूतियों का क्षेत्र बन जाता है जिसके माध्यम से व्यवस्थित विवेचना की संभावना घट जाती है।उन्होंने कहा कि राज्य भी एक सामाजिक संस्था है और जो स्वयं भी विघटन का शिकार है।समाज में प्रतिरोध का क्षेत्र समाप्त हो चुका है, समर्पण ही सही मान लिया गया है।आकाशवाणी भी व्यवसायिकता के आगे घुटने टेक चुका है।

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प्रो.कृष्ण कुमार ने ‘ शिक्षा का अधिकार कानून’   बहुत ही संभावना पूर्ण है।इससे गरीब और अमीर बच्चों के बीच एक पुल बनेगा लेकिन  फिलहाल इस पुल पर भगदड़ की स्थिति है।देश में 8 लाख प्राथमिक स्कूल, एक करोड़ शिक्षक हैं।हमें विवरणों के बीच जाने की जिज्ञासा और विचार का जोखिम उठाना ही  पड़ेगा। उन्होंने साहित्य और कल्पनाशीलता की भी महत्वपूर्ण भूमिका को उदाहरण सहित बताया। अध्यक्ष मंडल में  प्रो. टी.आर. कुण्डू, प्रो हरि सिंह सैनी,श्रीमती उर्मिला ग्रेवाल ,प्रो. सुभाष चन्द्र शामिल थे।

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