साथ तैरने वालों को मशविरा – कमला दास

कमला दास (1934-2009)
अनुवाद दिनेश दधिची

 साथ तैरने वालों को मशविरा

तैरना सीखोगे जब तुम
उस नदी में मत उतरना
जो न बहती हो समंदर की तरफ़
अनजान रहती हो जो अपनी मंज़िलों से
यह समझती हो कि बहना ही महज़ फ़ितरत है उसकी
ठीक वैसे ही कि जैसे ख़ून का दरिया थका-माँदा
बहा करता है ले कर साथ
यादों का प्रदूषित झाग सारा.
तैरते रहना समंदर बीच तुम निःशंक
उस विराट सुनील सागर में निडर
बन जाय जिसमें ज्वार पहला ख़ुद तुम्हारी देह
यह सुपरिचित देह ही बाधा खुराफ़ाती बनेगी
बस इसी को पार करना सीखना होगा तुम्हें.
यह सीख जाओगे अगर
तो बे-ख़तर होगे
सुरक्षित ही रहोगे देह से आगे।
कहीं यदि डूबना पड़ जाय, तो भी
देह से आगे
नहीं कुछ फ़र्क होगा….

Kamala Das (1934-2009)

 Advice to Fellow Swimmers

When you learn to swim
Do not enter a river that has no ocean
To flow into, one ignorant of destinations
And knowing only the flowing as its destiny,
Like the weary rivers of the blood
That bear the scum of ancient memories,
But go swim in the sea
Go swim in the great blue sea
Where the first tide you meet is your body,
That familiar pest,
But if you learn to cross it
You are safe, yes, beyond it you are safe,
For, even sinking would make no difference then…

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