एक अरज सुण तूं भाभी

महेन्द्र सिंह ‘फकीर’

एक अरज सुण तूं भाभी, घर मेरा भी बसवा दे,
होगा बड़ा भला तेरा, ब्याह मेरा भी करवा दे।

एक सूंट तेरा सिमा दूंगा, घर म्हं फोटो टंगवा दूंगा।
करुं आरती रोज सेवेरै, शाम नै बती-धूप करा दूंगा।
पाणी तेरै भरवा दूंगा, चुल्हा मेरा जळवा दे।

जो तुं कहवै जतन करुं, जो तूं चाहवै वचन भरुं,
डूब रहा कालर कोरै, तुं चाहवै तो पार तरुं।
सूखा पड्या मेरा जीवन इसमें, थोड़ा सा रंग भरवा दे।

जिस घर म्हं हो नहीं लुगाई, भूतणी आती उसमैं बताई,
कुआ, जोहड़ टोहणा होगा, कर ली भाभी बहुत समाई।
भगवान भला करै तेरा, घर मेरै दीवा जळवा दे।

गांव मारता तान्ने सारा, ठोकर खाता फिरै कंवारा,
घर कै बट्टा लागैगा, मेरै पास नहीं कोए चारा।
मेरे घर की खूंटी कै भाभी, लाल ओढऩी टंगवा दे।

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