मेवाती लोक गीत -मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री

मेवाती लोक गीत


मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री।
जितनी दगड़ा में रेत, जणी सू कहियो री।

इतनो गूंदो री, जितनी पोखर में कीच।
जणी सू कहियो री…

मां मेरो पीसणो, कितनो पीसो री।
इतनो पोयो री, जितना पीपळ में पात।

खागी-खागी री मां ऊ मुरगी की सी डार।
मोलू टिकिया रहगी एक, जणी सू कहियो री।

जणी से कहियो री…

मां मेरो छोटो देवर लाडलो वा टिकिया बी लेगो छीन
जणीं सू कहियो री, मां मेरो पीसणों…

मां मैं भूकी सोगी री जणीं सू कहियो री।

संकलन- माजिद मेवाती
स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (नवम्बर 2016 से फरवरी 2017, अंक-8-9), पेज- 113
 
 

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