एक कविता- जयपाल

जयपाल हरियाणा के अंबाला शहर में रहते हैं। उनकी कविताएं समाज के शोषित और पिछड़े वर्ग के हक में बोलती हैं।

जयपाल
 लिखना है
उन हाथों के लिए
जो ज़ंजीरों में जकड़े हैं
लेकिन प्रतिरोध में उठते हैं 
उन पैरों के लिए 
जो महाजन के पास गिरवी हैं 
लेकिन जलूस में शामिल हैं
उन आँखों के लिए 
जो फोड़ दी गई हैं 
लेकिन सपने देखी हैं 
उस ज़ुबान के लिए जो काट दी गई है
 लेकिन बेज़ुबान नहीं हुई 
होठों के लिए जो सील दिए गए हैं
 लेकिन फड़फड़ाना नहीं भूले 

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