वाङ़चू – भीष्म साहनी

अपने समाज व परिवेश से कटकर ना अतीत को समझ सकते, ना धर्म को. भावुकतापूर्ण दृष्टि विहीन अध्ययन किसी काम का नहीं. इतिहास बोध को स्थापित करती कहानी.

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