प्रेमचंद के साहित्यिक सरोकार और वर्तमान साहित्य


‘प्रेमचंद के साहित्यिक सरोकार औऱ वर्तमान साहित्य’ विषय पर आज सत्यशोधक फाउंडेशन और ओमप्रकाश ग्रेवाल संस्थान द्वारा प्रेमचंद जयंती और शहीद उधम की शहादत के उपलक्ष्य में एक विचार गोष्ठी ग्रेवाल अध्ययन संस्थान कुरुक्षेत्र में आयोजित की गई ! कार्यक्रम के मंच का संचालन राजेश कासनियां ने करते हुए प्रेमचंद के जीवन दर्शन व रचना संसार से परिचय करवाया जिसमें मुख्यवक्ता के तौर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के प्रोफेसर व देस हरियाणा पत्रिका के संपाद डॉ सुभाष चंद्र ने शिरकत की व सह वक्ता के तौर डॉ कृष्ण कुमार प्रोफेसर शहीद उधम राजकीय महाविद्यालय ,मटक माजरी इंद्री करनाल ने कार्यक्रम की भूमिका को विस्तार दिया! उन्होंने बताया कि प्रेमचंद के साहित्य के संदर्भो को प्रस्तुत करते हुए बताया कि उनका साहित्य हमें जीवन के भोगे हुए यर्थाथ से रूबरू करवाता है उसके साथ साथ हमारी कल्पना शक्ति को भी विस्तार देता है प्रेमचंद ऐसे कालजयी साहित्यकार हुए हैं जिन्होंने सर्वप्रथम आम जनमानस से जोड़ा! प्रोफेसर सुभाष चंद जी मुख्य वक्ता के तौर पर बातचीत रखते हुए बताया कि प्रेमचंद यह बात भलीभांति समझते थे कि अभियक्ति मानव का नैसर्गिक स्वभाव है इसलिए उन्होंने अपने साहित्य में पात्र व घटनाओं के माध्यम से रचनाओं में बुना ! प्रेमचंद का साहित्य मानवता को सर्वाच्च स्थान देता है ! प्रेमचंद ने बताया था कि साम्प्रदायिकता हमेशा संस्कृति की दुहाई देकर आती है जो आज भी प्रासंगिक प्रतीत होती है ! प्रोफेसर सुभाष जी ने प्रेमचंद के नारी विमर्श,दलित विमर्श के नजरिए व शंकाओं पर भी विस्तृत बातचीत रखी उनका कहना था कहानी कहने ढंग से ही हमारे साहित्य की दशा व दिशा तय होती है जो कि समय बीतने पर अ मृत बन जाती हैं और अंनत काल तक चलती रहती हैं!कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जलेस के राज्य प्रधान हरपाल गाफिल जी ने अध्यक्षीय टिप्पणी रखी ! उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य से प्रेरणा लेकर हम वर्तमान में साहित्य के उद्देश्यों के माध्यम से मानस पीड़ा को अभियक्ति दे सकते हैं! इस अवसर पर डॉ ओमप्रकाश करुणेश,डॉ रविंद्र गासो, बलदेव म्हरोक ,डॉ विजय विधार्थी, विपुल,मनजीत भोला व विश्विद्यालय विद्यार्थी-शोधार्थियों ने प्रतिभागिता की ! शोधार्थी नरेश दहिया ने कार्यक्रम भाग लेने आये सभी साथियों का आभार प्रकट किया!

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