जाले – जयपाल

जाले हर युग के होते हैं
हर युग बुन लेता है अपने जाले
हर युग चुन लेता है अपने जाले
धूल मिट्टी से सने प्राचीन जाले
मोती से चमकते नवीन जाले
समय इन जालों से टकराता है
जाले समय से टकराते हैं
युग परिवर्तन चलता रहता है

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