म्हारै गाम का चौकीदार

म्हारै गाम का चौकीदार
बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने ए देणा पड़े करदा। कोटा म्हं चीनी मिलणी होंदी, माटी का तेल मिलणा होंदा, पिलसण मिलणी होंदी, पंचैत होंदी, या फैर बोट पड़ने होंदे या सांग होंदा।
ओ सारा गाम म्हं गोवा देकै होण आळा प्रोग्राम में बैठ ज्यादां। उसकी गोवा देण पाच्छै कोए पूछ नहीं होवै थी।
एक बार गाम मैं धर्मबीर सांगी का सांग होणा था। चौकीदार की डूटी फैर गोवा देण की थी। रात नै सांग होण लाग्या। चौकीदार नै सोच्या सारा गाम बैठ्या सै। क्यूकर सारै गाम की नजरां में मेरी इज्जत बढ़ै, मनैं इसा के करणा चाहिए की म्हं भी मौजीज आदमी लागूं।
चौकीदार नै के करया, गाम का झोटा बणी कैनी चरा था। उसने झोटा और खागड़ हेर कै सांग म्ह बाड़ दिया। दंगल पाट्यगा, लोग उठ-उठ कै भाजण लागे।
अर चौकीदार स्टेज पै चढ़ गया।
खड्या होकै लोगा नै समझाण लाग्या
रै बैठ ज्यो – रै बैठ ज्यो, यू कुछ नीं, म्हं इस झोटा आर खागड़ ने भज्या दूंगा।
रै ना डरो, चौकीदार कै होंदे होए तामना के डर सै।
मैरा होंदे होए के फिक्र कर रहे हो।
गाम सुरक्षित हाथा म्हं सै।
 

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